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दाल पर दंगल क्यों ?

Posted On: 12 Jan, 2017 Hindi News में

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हमने तुमको है खून दिया, पर तुमने हमको दर्द दिया !
हमने तो सिर्फ रोटी मांगी और तुमने हमको धून दिया!!

यह बहुत ही हास्यपद लगता है जब किसी के खाने पर राजनीती होती है, खाना चाहे अमीर का हो गरीब का हो या किसी राजनेता का हो, अच्छा खाना खाने का हक़ सब को है, सरकार ने फ़ूड सिक्योरिटी बिल तो पास कर दिया, परन्तु क्या सब को खाना मिल रहा और अगर मिल रहा तो उसकी क्वालिटी क्या है, सरकार ने फ़ूड सिक्योरिटी बिल तो पास कर दिया पर खाने की गुणवत्ता को कौन देखेगा!

daal2 BSF में खाने को ले कर अभी जो घमासान चल रहा उसने तो सोचने पर मज़बूर कर दिया की क्या जो सेना का जवान हमारे लिए दिन रात जगता रहता है सरहदों की सुरक्षा करता है! धूल, धूप, मिट्टी, पानी, बरसात सब सहता है क्या वो दो वक़्त का अच्छा खाना खाने का हक़दार नहीं है! इनको सरकार भी इसी हिसाब से फंड्स देती है, उसके बिपरीत सरकार जो अफसर AC कमरो में बैठ कर मोटी सैलरी उठाते है उनको सारी सुख सुविधाये देती है!
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कितनी है ज़रूरत- फ़ूड सिक्योरिटी कार्ड के अनुसार एक वयस्क की डाइट में प्रति दिन एनर्जी- 8,700 किलोजौल्स , प्रोटीन-50 ग्राम्स, फैट- 70 ग्राम्स, सैचुरेटेड फैटी एसिड्स-24 ग्राम्स, कार्बोहाइड्रेट्स-310 ग्राम्स, शुगर्स-90 ग्राम्स,सोडियम (साल्ट)-2.3 ग्राम्स, डाइटरी फाइबर-30 ग्राम्स होना चाहिये! परन्तु ये डाइट रेगुलर व्यक्ति की है लेकिन जवान, फ़ोर्स, मिलिटरी के लोगो को इस से ज़्यादा न्यूट्रिशन्स की ज़रूरत होती है !

अगर हम अपने सरहद की रक्षा करने वालो को अच्छा खाना, अच्छा कपडे, अच्छे हथियार नहीं देंगे तो वो हमारी रक्षा उस तरफ से नहीं कर सकते जैसा वो करना चाहते हैं!
एक व्यक्ति जो भूखा है वो कितनी अच्छे तरह से अपनी ड्यूटी पूरी कर सकता है आप खुद सोच सकते हो ! अगर एक सेना के जवान को सही से खाना नहीं मिलेगा तो वो क्या भागेगा, क्या पहाड़ पर चढेगा, क्या रेत में ड्यूटी करेगा,क्या रात में जागेगा,
चाहे वो एक सामान्य व्यक्ति हो या सेना का जवान हो भूख सबको लगती है, इस लिए कब लोग खाना खाने के लिए और अच्छा खाना खाने के पुरे हक़दार है !

ऐसे भी कहा गया है की “भूखे भजन न होये गोपाला, ये लो कंठी ये लो माला”

Web Title : दाल पर दंगल क्यों ?



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